Monday, January 23, 2017
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Maa Durga Chalisa - Halchal Guru

Shri Durga Chalisa

श्री   दुर्गा   चालीसा (Shri Durga Chalisa)   या देवी सर्वभुतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥   नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अंबे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति

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Maa Durga Aarti - Halchal Guru

Shri Durga Ji Ki Aarti

श्री दुर्गा जी की आरती (Shri Durga Ji Ki Aarti) देवी वन्दना या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता  |  नमस्तस्यै  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: || आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी | तुमको निशि दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी || मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को | उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको || कनक समान कलेवर,

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Shri Ganesha Chalisa - Halchal Guru

Shri Ganesha Chalisa

श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesha Chalisa) ॥दोहा॥ जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू ॥ || चौपाई || जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥१ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥२ वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड

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Shri Ganesh Ji Ki Aarti -Halchal Guru

Shri Ganesh Ji Ki Aarti

श्री गणेश जी की आरती (Shri Ganesh Ji Ki Aarti)   जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥   एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी । माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी ॥   पान चड़ें, फूल चड़ें और चड़ें मेवा । लडुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥   अंधें को आँख

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Maa-Saraswati-Arti

Maa Saraswati Ji ki Aarti

माँ सरस्वती जी की आरती ( Maa Saraswati Ji ki Aarti ) कज्जल पुरित लोचन भारे, स्तन युग शोभित मुक्त हारे | वीणा पुस्तक रंजित हस्ते, भगवती भारती देवी नमस्ते॥ जय सरस्वती माता, जय जय हे सरस्वती माता | दगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता, जय जय हे सरस्वती माता | चंद्रवदनि पदमासिनी, घुति

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Maa-Saraswati-Chalisha

Maa Saraswati Chalisa

माँ सरस्वती चालीसा || चौपाई || जय श्रीसकल बुद्घि बलरासी । जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥ जय जय जय वीणाकर धारी । करती सदा सुहंस सवारी ॥ रुप चतुर्भुज धारी माता । सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥ जग में पाप बुद्घि जब होती । तबहि धर्म की फीकी ज्योति ॥ तबहि मातु का निज अवतारा ।

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Shri-Ram-halchalguru

Shri Ram Chalisa

श्री राम चालीसा श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥ ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥ दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥ तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥ तुम अनाथ के नाथ गुंसाई।

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Shri-Ram-Chandra-halchalguru

Shri Ram Chandra Ji Ki Aarti

रामचन्द्रजी की आरती (Shri Ram Chandra Ji Ki Aarti) श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं | नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं || श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं | श्री राम श्री राम... कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनीलनीरद सुन्दरं | पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं || श्री रामचन्द्र कृपालु

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Shree-Hanuman-Aarti-halchalguru

Shree Hanuman Ji ki Aarti

श्री हनुमान जी की आरती (Shri Hanuman Ji ki Aarti) मनोजवं मारुत तुल्यवेगं ,जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम् || वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं , श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे || आरती किजे हनुमान लला की | दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे | रोग दोष जाके निकट ना झाँके ॥ अंजनी पुत्र महा बलदाई | संतन

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Lord-Hanuman-halchalguru

Shree Hanuman Chalisa

॥दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥ ॥चौपाई॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥ महाबीर

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